कोलकाता, 28 जून:
इंडिया वन फाउंडेशन एवं पुलिस पब्लिक प्रेस के संयुक्त तत्वावधान में 28 जून को द पार्क होटल, कोलकाता में “टूटते रिश्ते, खामोश समाज” विषय पर एक भव्य एवं सफल राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजसेवियों, शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, चिकित्सकों, उद्योगपतियों एवं बुद्धिजीवियों ने भाग लेकर वर्तमान समय में परिवार और समाज के सामने खड़ी गंभीर चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में पारिवारिक मूल्यों के क्षरण, रिश्तों में बढ़ती दूरियों, सामाजिक संवेदनहीनता तथा समाज की चुप्पी जैसे गंभीर विषयों पर सार्थक संवाद स्थापित करना था। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि समय रहते इन समस्याओं पर सामूहिक प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ एवं मजबूत पारिवारिक व्यवस्था बनाए रखना कठिन हो जाएगा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री पवन पटोदिया (कोलकाता) ने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा कि परिवार किसी भी समाज की सबसे मजबूत इकाई होता है। यदि परिवार कमजोर पड़ता है तो समाज भी धीरे-धीरे बिखरने लगता है। उन्होंने अपने विचारों के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को यह विश्वास दिलाया कि सामाजिक जागरूकता, संवाद, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को पुनर्जीवित करके ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है।
“टूटते रिश्ते-खामोश समाज” विषय पर सफल राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
संगोष्ठी में प्रधान अतिथि के रूप मैं बोलते हुए डॉ बसंत गोयल ने कहा समाज के लिए सभी को समय देना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पारस कोचर, डॉ. ममता बनानी, श्री भावन कामदार, श्री विमल बेंगानी, श्री राजकुमार मित्तल, श्रीमती मधुमिता गुप्ता, श्री सुधांशु शेखर तथा श्रीमती मंजू अग्रवाल सहित अनेक प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए। सभी वक्ताओं ने सामाजिक एकजुटता, पारिवारिक मूल्यों की रक्षा, आपसी संवाद और नैतिक शिक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

कार्यक्रम के आयोजक श्री पवन कुमार भूत ने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में भी किया जाएगा, ताकि समाज को जागरूक किया जा सके और परिवारों को मजबूत बनाने की दिशा में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली संचालन श्री केयूर मजूमदार ने किया। संगोष्ठी के अंत में सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया गया।

यह संगोष्ठी सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण तथा मजबूत और संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक पहल साबित हुई।



